.......... खलता है ..........
कुछ खलता है मुझको
वो भीड़ मे मुझको किनारा कर देना
अपनो कि महफ़िल मे बेगाना कर देना
कुछ खलता है मुझको....
रट लगाये रहती थी
जो मेरे ही नाम कि..
आज उसका दिनभर मे.
एक बार भी नाम ना लेना
कुछ खलता है मुझको....
छोटी बड़ी खुशियों मे
कभि मैं साझेदार था।
उन मीठी नादानियों... शैतानियों में
बराबर का हिस्सेदार था।
उनके जाने कि खब़र का
ग़ैरो से मिलना..
कुछ खलता है मुझको....
बात बात पर लड़ना झगड़ना
आदत में शुमार था..
आज हमसे खफ़ा होकर
यूँ चुप्पी साध लेना
कुछ खलता है मुझको....
सालों बाद आज मुलाकात हुयी
एकटक एक दूजे को देखते जाना...
मेरा उनसे हाल पूछने पर
वापस जवाब ना आना
कुछ खलता है मुझको....
उसके चेहरे का नूर .. कहीं गायब था ।
वो मेरा जोर देने पर..
उसका टूट कर बिखर जाना
कुछ खलता है मुझको....
छत पर चोरी छिपे मिलने जाना
सर्दियों में रेबड़ी और मूँगफली संग
अपने अपने दिल का हाल सुनाना
उस प्यार को उन छज्जों पर..
छोड़ आना मेरा
बहुत खलता है मुझको..
कुछ खलता है मुझको....
कुछ खलता है मुझको....
© विदा देना - अभि©
कुछ खलता है मुझको
वो भीड़ मे मुझको किनारा कर देना
अपनो कि महफ़िल मे बेगाना कर देना
कुछ खलता है मुझको....
रट लगाये रहती थी
जो मेरे ही नाम कि..
आज उसका दिनभर मे.
एक बार भी नाम ना लेना
कुछ खलता है मुझको....
छोटी बड़ी खुशियों मे
कभि मैं साझेदार था।
उन मीठी नादानियों... शैतानियों में
बराबर का हिस्सेदार था।
उनके जाने कि खब़र का
ग़ैरो से मिलना..
कुछ खलता है मुझको....
बात बात पर लड़ना झगड़ना
आदत में शुमार था..
आज हमसे खफ़ा होकर
यूँ चुप्पी साध लेना
कुछ खलता है मुझको....
सालों बाद आज मुलाकात हुयी
एकटक एक दूजे को देखते जाना...
मेरा उनसे हाल पूछने पर
वापस जवाब ना आना
कुछ खलता है मुझको....
उसके चेहरे का नूर .. कहीं गायब था ।
वो मेरा जोर देने पर..
उसका टूट कर बिखर जाना
कुछ खलता है मुझको....
छत पर चोरी छिपे मिलने जाना
सर्दियों में रेबड़ी और मूँगफली संग
अपने अपने दिल का हाल सुनाना
उस प्यार को उन छज्जों पर..
छोड़ आना मेरा
बहुत खलता है मुझको..
कुछ खलता है मुझको....
कुछ खलता है मुझको....
© विदा देना - अभि©
Kya khub likha hai Abhinav bhai.
ReplyDeleteThanks bro
Deletemast hai.. 😊
ReplyDeleteThanks bro
DeleteBahut badiyaaaaa bhai...
ReplyDeleteThanks bhai
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