...... गुज़रता वक्त......
समय तो गुजरता ही रहता है....
अपनी ग़ती से.
इंसान कहीं पीछे छूट जाते हैं।
वक्त गर रुकता कभी किसी के लिये
तो शायद कभी बढ़ ना पाता.
वो जो होना है भविष्य में
वो कहीं कभी घट ना पाता।
ईश्वर कि इच्छाएँ भी.. तमाम फेल हो जाती
क्या भरोसा कितनी माँऐ..
फिर उन्हें मनाती।
और कभि बैठे हुए याद..आ ही जाती है
ये कम्बख्त कितना रूलाती है
अतीत के गलियारों से आ कर..
बेवजह आज को.. हिला जाती है।
फिर सोचते हैं कि चीजें
कितनी जल्दी बदल गयीं....
माँ कहने वाली जुबां
कब मौम मे बदल गयी।
माँ भी तो कितनि बदली
दिखाई पड़ती है...
अब ढूंढे से वो आँचल नहीं मिलता
जिसकी छॉव मे कभि सो जाते थे..
कभी रोये जो लिपट कर उससे
आँचल में वो आँसू पिरोये जाते थे।
दोश किसी का नहीं.. किससे कहें भी जाके
कोई फायदा नहीं इन बातों का अब...
वक्त बदलना होता है
और बदलाव माँगता है...
पुराने रिश्ते जिन्दा रखने के लिए
नये हिसाब माँगता है....
पुराने रिश्ते जिन्दा रखने के लिए
नये हिसाब माँगता है....
© विदा देना - अभि ©
समय तो गुजरता ही रहता है....
अपनी ग़ती से.
इंसान कहीं पीछे छूट जाते हैं।
वक्त गर रुकता कभी किसी के लिये
तो शायद कभी बढ़ ना पाता.
वो जो होना है भविष्य में
वो कहीं कभी घट ना पाता।
ईश्वर कि इच्छाएँ भी.. तमाम फेल हो जाती
क्या भरोसा कितनी माँऐ..
फिर उन्हें मनाती।
और कभि बैठे हुए याद..आ ही जाती है
ये कम्बख्त कितना रूलाती है
अतीत के गलियारों से आ कर..
बेवजह आज को.. हिला जाती है।
फिर सोचते हैं कि चीजें
कितनी जल्दी बदल गयीं....
माँ कहने वाली जुबां
कब मौम मे बदल गयी।
माँ भी तो कितनि बदली
दिखाई पड़ती है...
अब ढूंढे से वो आँचल नहीं मिलता
जिसकी छॉव मे कभि सो जाते थे..
कभी रोये जो लिपट कर उससे
आँचल में वो आँसू पिरोये जाते थे।
दोश किसी का नहीं.. किससे कहें भी जाके
कोई फायदा नहीं इन बातों का अब...
वक्त बदलना होता है
और बदलाव माँगता है...
पुराने रिश्ते जिन्दा रखने के लिए
नये हिसाब माँगता है....
पुराने रिश्ते जिन्दा रखने के लिए
नये हिसाब माँगता है....
© विदा देना - अभि ©
mast hai bhai.. so realistic and meaningful. 👍👍
ReplyDeleteThanks parvesh..
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