Thursday, June 7, 2018

Kasmakash

                          ... कशमकश ...

    कुछ किस्से हैं कुछ बातें हैं
    कुछ तेरे हैं... कुछ मेरे हैं
    कुछ अपने हैं कुछ अभि भी सपने हैं
    कुछ किस्से हैं कुछ बातें हैं

    चिलचिलाती धूप मे
    रुकती नहीं कभी तू
    आवाज मेरी सुनती तो है
    पर मुड़ती नहीं कभी तू ।

    नाराजगी तेरी जायज तो है
    पिछले इतवार की तरह
    मैं इस हफ्ते भी जो तुझे
    समय ना दे सका 
    हर बार की तरह

    पर जानता हूँ.. 
    कि मना लूँगा तुम्हें
    कुछ प्यार भरे शब्द जब बोलूंगा
    जिम्मेदारी के तराजू मे
    रख पावो भर दिल जब तोलूँगा ।

    कुछ परेशान सी लगी मुझे
    वो डबडबायी आँखें तेरी
    ना जाने कितने सवाल
    उस मायूस चेहरे पर थे

    देखता रहा बस दूर से
    पास आने कि हिम्मत ना हुई
    हर बार की तरह

    कुछ किस्से हैं कुछ बातें हैं
    कुछ तेरे हैं... कुछ मेरे हैं
    कुछ अपने हैं कुछ अभि भी सपने हैं
    कुछ किस्से हैं ...
    कुछ बातें हैं....

                      विदा देना © अभि ©