Sunday, February 12, 2017

Sapoot

...................... सपूत ........................

माँ भारती तेरे सपूतो को सलाम करता हूँ...
चंद पंक्तिया जो चले गये..उनके नाम करता हूँ.

काश वो बात हर रो़ज की...आखिरी ना होती..
खबर मिली घर पर कि तू चला गया...
माँ बिलख के ना रोती...

और सब सही चल रहा था...
आर्मी मे रहकर मन्दिर की रक्षा कर रहा था..
काश चंद रोज़ पहले तबादला ना होता..
तू भी कहीं मेरे आस पास होता..

बड़ी खुशी से दी थी विदाई तुझको..
क्या पता था कि ना देगा अब दिखाई मुझको..

मन की करता था बस अपनी...
मैं कहती थी बाबू कि नौकरी कर ले...
डाक्टरी , इन्जिनियरी, कोई शांत काम कर ले..
तू ठान के बैठा था कि आर्मी मे जाऊँगा....
शर्मा ,वर्मा ,मिश्रा .... सब से सल्यूट कराऊँगा..

अब तो वो दिन इक बुरा सपना सा लगता है....
ना हारी होती तेरी ज़िद के आगे...
शायद यहीं लेटा होता पाँव फैला के...

देश भक्ती का जज्बा भी अच्छा था..
भारत माँ की रक्षा करूँगा इरादा सच्चा था..
भारत माँ के तो तमाम सहारे थे..
क्या लगे ...हमारे रिश्ते खारे थे.....

अब सोचती हूँ कि तेरी इच्छा ने 
जन्म ना लिया होता...
वो देश पे मरने का जुनून...पलने ना दिया होता

तू ले ही गया जो चाहता था...
आखिरी इच्छा अपनी ...बचपन से ही गाता था
मिल गयी दिल को तस्ल्ली..
हमें जिन्दगी भर का ग़म देके...

माँ भटकती है सड़को पर..
तेरा नाम ले लेके...
क्या पा गया दुनिया से जाते..जाते..
इक्कीस तोपों की सलामी लेके....

इक्कीस तोपों की सलामी लेके....

        विदा देना ©अभि©

4 comments: