.......... कुछ कदम ..........
उँगलीयो से थाम उँगलिया...
हाथों मे बंद अहसास
चलो कुछ बीती बातें याद करते हैं
कुछ कदम फिर से साथ चलते हैं
कुछ अलग सा अहसास कह लो...
या अज़नबी खा़मोशी
तोड़ने को ये सिलसिला
पहल आज करते हैं
चलो कुछ कद़म फिर साथ चलते हैं
मेरे गिरने पर तुम्हारा खिलखिलाना...
खुद तो मेरा सहारा ले ....संभल जाना
कई ऐसे किस्सो को दो चार करते हैं
कुछ कद़म फिर साथ चलते हैं
बचपन की वो डाँट डपट...
वो खींचातानी मिठी सी....
पैप्सी , पारले , नटखट... झगड़ा इनपर
फिर एक बार करते हैं
चल कुछ कद़म फिर साथ चलते हैं
कितना दूर निकल आये...
हम कुछ कदम चलते चलते.....
अब पीछे को रूख़ यार
इक साथ करते हैं
चलो कुछ कद़म फिर साथ चलते हैं
चल कुछ कद़म फिर साथ चलते हैं ।
विदा देना ©अभि©
उँगलीयो से थाम उँगलिया...
हाथों मे बंद अहसास
चलो कुछ बीती बातें याद करते हैं
कुछ कदम फिर से साथ चलते हैं
कुछ अलग सा अहसास कह लो...
या अज़नबी खा़मोशी
तोड़ने को ये सिलसिला
पहल आज करते हैं
चलो कुछ कद़म फिर साथ चलते हैं
मेरे गिरने पर तुम्हारा खिलखिलाना...
खुद तो मेरा सहारा ले ....संभल जाना
कई ऐसे किस्सो को दो चार करते हैं
कुछ कद़म फिर साथ चलते हैं
बचपन की वो डाँट डपट...
वो खींचातानी मिठी सी....
पैप्सी , पारले , नटखट... झगड़ा इनपर
फिर एक बार करते हैं
चल कुछ कद़म फिर साथ चलते हैं
कितना दूर निकल आये...
हम कुछ कदम चलते चलते.....
अब पीछे को रूख़ यार
इक साथ करते हैं
चलो कुछ कद़म फिर साथ चलते हैं
चल कुछ कद़म फिर साथ चलते हैं ।
विदा देना ©अभि©
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