.........संभलना - फिर से............
उस पुराने बस्ते से.. मेरी किताबें झाँकती थी...
पैन्सिल और रबड़...इस कोने से उस कोने
भाग़ती थीं ....
मेरे मन का डब्बा..लन्च का इंतजार करता था.
यूँ अचानक छूटा मेरे हाथों से....
वो बस्ता कुछ भारी था शायद...
मै संभाल नही पाया....
नन्हे कदमो का यूँ बढ़ जाना..
वो वाक़र पर चलते चलते..कब साइकिल पे चढ़ जाना...
द्सवीं की परिक्षा का इनाम मोटर साइकिल था
उन शुरूआती .....शुरूआती अपेक्षाओं का...
उन काँधो पे दवाब .....
मै संभाल नही पाया....
सुबह सुबह पंक्षियो का चहकना...
बेफ़िक्र परिंदो का उड़ना खुले आसमान के नीचे...
आज़ाद गगन मे साँसे लेना....
वो उनका वापस आ जाना इक सीटी के
बुलावे पर....
घर की अटरिया पर वो दरब़ा......
मै संभाल नही पाया....
अपनी शर्तों पर जीनी थी ज़िन्दगी हमें .....
ये अमूम़न गुरूर रहा होगा.....
हालात जब शर्तें गिनाने पे आऐ....
मै संभाल नही पाया....
मै संभाल नही पाया....
विदा देना © अभि ©
समाप्त।
उस पुराने बस्ते से.. मेरी किताबें झाँकती थी...
पैन्सिल और रबड़...इस कोने से उस कोने
भाग़ती थीं ....
मेरे मन का डब्बा..लन्च का इंतजार करता था.
यूँ अचानक छूटा मेरे हाथों से....
वो बस्ता कुछ भारी था शायद...
मै संभाल नही पाया....
नन्हे कदमो का यूँ बढ़ जाना..
वो वाक़र पर चलते चलते..कब साइकिल पे चढ़ जाना...
द्सवीं की परिक्षा का इनाम मोटर साइकिल था
उन शुरूआती .....शुरूआती अपेक्षाओं का...
उन काँधो पे दवाब .....
मै संभाल नही पाया....
सुबह सुबह पंक्षियो का चहकना...
बेफ़िक्र परिंदो का उड़ना खुले आसमान के नीचे...
आज़ाद गगन मे साँसे लेना....
वो उनका वापस आ जाना इक सीटी के
बुलावे पर....
घर की अटरिया पर वो दरब़ा......
मै संभाल नही पाया....
अपनी शर्तों पर जीनी थी ज़िन्दगी हमें .....
ये अमूम़न गुरूर रहा होगा.....
हालात जब शर्तें गिनाने पे आऐ....
मै संभाल नही पाया....
मै संभाल नही पाया....
विदा देना © अभि ©
समाप्त।
Waah....gazab
ReplyDeleteThanks
DeleteWaah....gazab
ReplyDeleteThanku bro
DeleteAbhi bhai bhut hi sundar sabdo ko Piroya h anmol rachna✏✏✏
ReplyDeleteDhanyawad bhai ravi
DeleteAbhi bhai bhut hi sundar sabdo ko Piroya h anmol rachna✏✏✏
ReplyDeleteBahut sundar...I started visualising my childhood
ReplyDeleteEfforts paid sis...☺...thanku..
DeleteMunnu Really so smooth if you read 1st stanza you have to read remaining automatically.
ReplyDeleteThanks Pachori
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