.............. ऐ ज़िन्दगी .............
ज़िन्दगी कभी तो ठहरेगी तू भी...
तभी सारा हिसाब कर लेंगे .
कुछ पल जो ससतायेगी ...
उम्र के पढ़ावो मे.
तभी पिछला हिसाब कर लेंगे
ज़िन्दगी कभी तो ठहरेगी तू भी...
चल पड़ता हूँ अंजान राहों पे..
मन का मोर जहाँ ले जाये..
थिरक लेता हूँ कभि..
कभि अपनी , कभी गै़रो कि धुनो पर..
ससताने के ख़याल को टाल जाता हूँ.
सोच कर ....के तेरा साथ निभाता हूँ..
ज़िन्दगी कभी तो ठहरेगी तू भी...
तभी साथ मे आराम कर लेंगे.....
ज़िन्दगी कभी जो ठहरेगी तू भी...
जीवन में कोई मलाल ना हो.
जो पैदा करे घुटन.. ऐसा सवाल ना हो...
घुट घुट के जीना भी कहाँ जीना है....
पीने को तो पी लेंगे....
गर नियती में ही जहर पीना है...
नियती को बदलने का प्रयास कर लेंगे...
तुझसे और द़ो चार सवाल कर लेंगे...
ज़िन्दगी कभी तो ठहरेगी तू भी..
ज़िन्दगी कभी जो ठहरेगी तू भी.....
मेरी रफ्त़ार मे अब कुछ कम़ी है...
साथ छोड़ दिया है सब ने
बस इस बात की ग़मी है....
ज़िन्दगी अब समझ आया,
तेरे चलने का राज़....
तेरे चलने से ही.. मेरे जीवन में गत़ी है...
ये ख्व़ाब लगता है अधूरा रह जायेगा.
जिन्दगी जो थमी तो कहाँ जीवन रह जायेगा
जिन्दगी जो थमी तो कहाँ जीवन रह जायेगा....
सब बातें भ्रम सी रहीं फिर......
गुफ्तगू तेरे साथ कर लेंगे
तुझसे नये दो चार सवाल कर लेंगे....
ज़िन्दगी कभी जो ठहरेगी तू भी...
ज़िन्दगी कभी जो ठहरेगी तू भी.......
विदा देना © अभि©
ज़िन्दगी कभी तो ठहरेगी तू भी...
तभी सारा हिसाब कर लेंगे .
कुछ पल जो ससतायेगी ...
उम्र के पढ़ावो मे.
तभी पिछला हिसाब कर लेंगे
ज़िन्दगी कभी तो ठहरेगी तू भी...
चल पड़ता हूँ अंजान राहों पे..
मन का मोर जहाँ ले जाये..
थिरक लेता हूँ कभि..
कभि अपनी , कभी गै़रो कि धुनो पर..
ससताने के ख़याल को टाल जाता हूँ.
सोच कर ....के तेरा साथ निभाता हूँ..
ज़िन्दगी कभी तो ठहरेगी तू भी...
तभी साथ मे आराम कर लेंगे.....
ज़िन्दगी कभी जो ठहरेगी तू भी...
जीवन में कोई मलाल ना हो.
जो पैदा करे घुटन.. ऐसा सवाल ना हो...
घुट घुट के जीना भी कहाँ जीना है....
पीने को तो पी लेंगे....
गर नियती में ही जहर पीना है...
नियती को बदलने का प्रयास कर लेंगे...
तुझसे और द़ो चार सवाल कर लेंगे...
ज़िन्दगी कभी तो ठहरेगी तू भी..
ज़िन्दगी कभी जो ठहरेगी तू भी.....
मेरी रफ्त़ार मे अब कुछ कम़ी है...
साथ छोड़ दिया है सब ने
बस इस बात की ग़मी है....
ज़िन्दगी अब समझ आया,
तेरे चलने का राज़....
तेरे चलने से ही.. मेरे जीवन में गत़ी है...
ये ख्व़ाब लगता है अधूरा रह जायेगा.
जिन्दगी जो थमी तो कहाँ जीवन रह जायेगा
जिन्दगी जो थमी तो कहाँ जीवन रह जायेगा....
सब बातें भ्रम सी रहीं फिर......
गुफ्तगू तेरे साथ कर लेंगे
तुझसे नये दो चार सवाल कर लेंगे....
ज़िन्दगी कभी जो ठहरेगी तू भी...
ज़िन्दगी कभी जो ठहरेगी तू भी.......
विदा देना © अभि©