...............संभलना...............
मै संभाल नही पाया...
बचपन मे ..टाफियां और सिक्के
वो जो घर से मिले थे ....
जेबों मे भरे हुये कंचे
मै संभाल नही पाया....
वो चहकती गलियां...जो गूंजती थी
मेरे जैसे कितनो के शोरगुल से....
उनकी ये खा़मोशी....सूनापन...
मै संभाल नही पाया....
वो साथ मे बढना किसी के...
गुजा़री हो दिन रा़त साथ उन्ही के...
वो उस शाम को ...उनका ना लौटना ..
मै संभाल नही पाया....
जिंदगी के कई रंग देखे...
होली मे नाचते .... झूमते...पिये भंग देखे..
वो उस दिन यूं.. बेरंग देख उन्हे...
मै संभाल नही पाया....
बीते प़लो का यूँ यादें बन जाना..
कुछ खटृी ..कुछ मीठी..इक कोने मे बस जाना
कुछ लोग खडे थे साथ मेरे....लेकिन उन्हे ....
मै संभाल नही पाया....
बिदा देना © अभि ©
....जारी रहेगा.....
मै संभाल नही पाया...
बचपन मे ..टाफियां और सिक्के
वो जो घर से मिले थे ....
जेबों मे भरे हुये कंचे
मै संभाल नही पाया....
वो चहकती गलियां...जो गूंजती थी
मेरे जैसे कितनो के शोरगुल से....
उनकी ये खा़मोशी....सूनापन...
मै संभाल नही पाया....
वो साथ मे बढना किसी के...
गुजा़री हो दिन रा़त साथ उन्ही के...
वो उस शाम को ...उनका ना लौटना ..
मै संभाल नही पाया....
जिंदगी के कई रंग देखे...
होली मे नाचते .... झूमते...पिये भंग देखे..
वो उस दिन यूं.. बेरंग देख उन्हे...
मै संभाल नही पाया....
बीते प़लो का यूँ यादें बन जाना..
कुछ खटृी ..कुछ मीठी..इक कोने मे बस जाना
कुछ लोग खडे थे साथ मेरे....लेकिन उन्हे ....
मै संभाल नही पाया....
बिदा देना © अभि ©
....जारी रहेगा.....